Monday, February 20, 2012

kavita-ith

  इट
छोटी के सिर पर धरी
पाच ईटो को देखकर
बाल मजदूर का रोना रोने वालो
छोटी
भी जाती  थी स्कूल
अक्षर तो क्या
पोषाहार भी नहीं मिला उसे
मरसाब का पेट
बढ़ता गया
छोटी का पिचकता .
छोटी की सिर पर धरी ईटो
में है
माँ की दवाई
पिता की शराब
भाई की कापी
अगर
उसके सिर से उठा ली ईटे
तो भी बन जाइएगा भवन
पर छोटी के चूल्हे में लगी ईटे
ठंडी ही रह जाएगी .

Tuesday, February 7, 2012

hasya-vyang- 4

*मजनू थोडा धीरे -धीरे चल
  तेरे चलने से धूल उडती है
  लैला मेकअप कर रही है
   धूल चहरे चढ़ रही है
*तुम्हारे हाथ में जब मेरा हाथ होता है
  मेरा दिमाग ख़राब होता है
  कैसे तुम्हारी अंगुठिया निकाल लू
   दिमाग में रहता है
*मै रुमाल हू किसी और का
  मुझपे छिकता कोई और है
  तू टेक्सी है किसी और की 
  तुझपे बैठता कोई और है .