प्रिय ,
क्या मैंने तम्हे इसलिए ऊंच -नीच कही की मैं ईष्या ,जलन से भर गया था की मुझे लगा की मैंने तुम्हे दिया है की मैंने तुम पर अविश्वास किया तुम दूसरे की हो गई हो।
क्या मैं तुम्हारे और उसके बीच आया। मेरा प्रेम क्यों असुरक्षित हो गया जब मुझे पता लगा की तुम उसके साथ हो गई हो। मुझे लगभग छोड़ने का निर्णय कर चुकी हो।
मैं जनता हूँ तुम्हे मुझसे प्रेम नहीं है कभी था भी नहीं .... पर मुझे यहाँ सच नहीं लग रहा बहुत झुकाव तो तुम्हारा मेरी तरफ था ही।
मैं तुमको बता दू की मैं देह का पुजारी नहीं हु देह मेरी प्राथमिकता कभी नहीं रही मैं तो प्रेम, स्नेह , अपनांपन , लगाव से दिल से जुड़ता हूँ। इसलिए उसकी तरफ जुड़ गई तो मेरा दिल गया मेरा अस्तित्व गया।
मेरे जैसे लोगों के जीवन में आंसुओ से दोस्ती रहती है क्युकी मेरे जैसे लोग पसंद आनेवालों के साथ जुड़ जाते है जब दिल टूटता है तो भीतर दरिया बहने लगता है।
हर पल तुम्हे याद कर रहा हु। हर पल तुम्हारे साथ जी रहा हूँ हर पल मर रहा हु। हर देखने चाहत है तुम्हारे साथ जीने की तमन्ना है। मोबाइल पर हाथ है करू कॉल पर दिमाग रोकता है अब पहली कॉल तुम करोगी..... तुम करोगी तभी...... और कही इंतजार में जीवन गुजर जाए
सिर्फ तुम्हारा