Saturday, December 22, 2012

somanath se shitala mata tak

   history me padha hai ki mohammad gori 700 solider ko lekar aaya tha gujrat ke somnath mandir ko lutane .7000 pande the vaha .ve havan kar rahe the .swava ....god ka aavahan kar rahe the par gori 500 camels par gold rakh lega . pande swava hi karte rahe .
  hal hi me partapur ke shitala mata mandir se shikhar chori ho gaya . pande,bhakat coro ko padane ke liye navchandi,rudharaksh path kar rahe the . havan me swava... chal raha tha .
   kuch bhi nahi badla gori se chor tak .agar usme dam hota to lutera,chor kaise himmat karta. vo punishmint kyu nahi deta ? mantro me bal hai...kaha hai ?
   pande kabhi nahi manege ki mantra nahi shorya chahiye . mantra....swava me dakshni hai . mal hai ... par dharma nahi . dukan chalni chahiye . yaha hamre desh ka durbhagya hai ki yahi hamara culture hai .

Friday, November 16, 2012

kavita-mangadh

फैरिवाला चिल्ला रहा था
सच ले लो -2
खुला हुआ सच ले लो
मॉल में पैकिंग में
ब्रांड नाम से रखा था सच
 दोनों  के  खरीदार  है
एक  के आम ,दूसरे  के  खास
फैरिवाला  का  सच 
मॉल  के  सच  से 
हार  जाएगा
मॉल का  सच  ही
इतिहास  में  जगह  बनाएगा .

Thursday, November 1, 2012

kavita

aaj to ravan hi ravan jala raha
ravan apne kharch se putla bana raha
ram ki savari khud hi khich rahe
khud hi tali baja raha
jalte dekh khud ka mal

ravan janta hai jalane bhar se
mara nahi karta
jab tak tulsi hai
ravan ko gadhta rahega . 

Friday, October 26, 2012

kavita -char ravan

रावण  तो कब का मर गया
अपनी बहन पर तेजाब फैकने वाले से
कौन भाई लेता है बदला
खटखटाता है न्यायालय का खटका

रावण  तो कब का मर गया
लक्ष्मण जिन्दा है
खिचता रहता है रेखाए
कभी खाप में ,कभी अपने -आप में .

रावण  तो कब का मर गया
अब छोड़ देता है अपहरण कर्ता
बगैर छुए ,भोगे ,मारे
कोई सीता .

रावण तो कब का मर गया
अपनी मान्यता ,संस्कृति ,आस्था को बचाने
लड़ता,मरता  है कौन भला ,पागल नादान
इन सबको बचाने .

Monday, October 15, 2012

kavita - dimak ke liye

मै अपनी कविताओ का संग्रह छपवा दू
लाइब्रेरी के ढेर में एक और बड़ा दू
खूश होगा कौन ?
दीमक .....और कौन ?

kavita-kalam bechana nahi aata

तुम कहते हो मुझे
तुमसा लिखना नहीं आता
सत्ताधारियों को अच्छा लगे
एसा कहना नहीं आता
घोषति में मंच पर बैठ
एसा पढना नहीं आता
सुन भाई ,
मुझे कलम बेचना नहीं आता .

kavita-hath me kyu nahi patthar

क्या तुम्हे दिखता नहीं
या .तुममे हिम्मत नहीं
तुम मेसे ही एक
झोपड़ी से निकलकर
पहुच गया महल
टूटी साईकल छोड़
बोलेरो में कर रहा सफ़र
तुम्हारे बच्चे चारा रहे बकरी
उसके पढ़ रहे प्राइवेट स्कूल
तुम्हारी बीवी तरस रही साडी
उसकी पहने सोना भारी
क्या सचमुच तुम्हे दिखता नहीं
दिखता तो होगा
आखे है सही सलामत
कान  में नहीं ठुसी  रुई
दिमाग की खिड़की है खुली
फिर
हाथ में क्यों नहीं है पत्थर .?

Saturday, September 22, 2012

kavita - jumala

jaise hi unhe pata laga
meri jati ka
meri yogyata ,pratiba ,
visheshata aur vidhvata
dikhana band ho gai .

mera likha kai se
mara huaa ho gaya
mera bola kisi or ka
tarasa ho gaya

meri jati ko lekar
kitane hi purvagrha bhare hai inme
jisaki taraju par
tolate hai mujhe

jati kisi insan ko janane
samajhne
atyachar ,shoshan karne adhikar hai

kisi bhi pad par pahuch jao
unki najro me meri ek aaukat hai
usko pramanit karne ke
jumale hajar hai .
ka

Tuesday, September 18, 2012

आज ही साईं बाबा के कंधे पर बैठे गणेश की प्रतिमा देखकर  आया कही डॉ अम्बेडकर के कंधे पर भी गणेश बैठे होंगे !

Saturday, September 1, 2012

photo

kavita-yad

याद
मुझे याद था तेरी मोत का दिन
एक दिन    पहले से
पर कल भूल गया
आज याद आया
कल का दिन
क्यों 
याद नहीं रहती तु मोत के दिन
याद रहती है रोज
हर पल
भूल क्यों जाता हु इसदिन .

Saturday, July 21, 2012

kavita-delivery room

डिलीवरी रूम
मेरा ही नहीं उसका भी
पीढ़ी दर पीढ़ी घर है यह
वो मीटर ,गदर या
लाइट फिटिंग पट्टी पर
गुजार देती है रात .
जब घर के भीतर
घर बनाने को
लाती है एक -एक तीनका
बनाती है डिलीवरी रूम
तब भी रहता है उसका घर
पर
अब कहा गौरेया ?
और कहा बनाने देती है गृहणी
डिलीवरी रूम .

Tuesday, July 3, 2012

kavita - ujadana

1 . पहले लकड़ी के लिए
     फिर पानी
     फिर भूमि
     अब
     तुम्हे उजड़ना है
     हमारी रोशनी के लिए .
2.   जब    वे आए
      तुम  गए गहन जंगलो में
     काट  दिए जंगल
     अब तुम्हे समाना है उनमे .

Monday, June 18, 2012

Q-A

 प्रश्न -     तथाकथित राजस्थानी भाषा में दलित  साहित्य नहीं है ?
 उत्तर - राजस्थानी भाषा सामंती है इस लिए इसमें दलित चिंता नहीं है .

Tuesday, April 24, 2012

gajal - mobile

तू मुझसे दूर चली गई
लगा ख़ुशी रूठ चली गई
तेरे  मेसेज डिलीट करने लगा
तू मोबाइल से भी चली गई
तेरी पसंद की रिंग टोन बदली
जिंदगी   से संगीत  चली गई
वाल से तेरा फोटो जो हटाया
तेरी छवि  दिल से चली गई

Thursday, April 19, 2012

kavita - aalochna

alochana ko  sun-padh
tujhe gussa to  aaya hoga 
pathar hath me le
gurraya  to  hoga 
faikana aasan nahi
kisi ne samjaya hoga  .

Friday, March 30, 2012

gajal -vo

हर किसी को दुश्मन बनाये वो
इस दौर में किसे अपनाये वो
प्यार करना तो चाहता है
मुखोटे लगे    चहरे कैसे धुलाये  वो
शालीनता से बोलता रहा है  हमेशा
मर्यादा  नेता को कैसे सिखाये वो
रोज खुल रहे है भर्ष्टाचार के मामले
चुप चाप  रहकर कैसे देखता वो
तंग   है रोज -रोज सुनकर नारा
mera  bharat    महान कैसे गाए वो  

Friday, March 2, 2012

kavita-man karta hai

मन करता है बन्दूको की खेती  कर दू
मन करता है वंचितों में लावा भर दू
मन करता है जमीं-आसमा  लाल कर दू
मन करता है इंसानों  में मानवता भर दू

Monday, February 20, 2012

kavita-ith

  इट
छोटी के सिर पर धरी
पाच ईटो को देखकर
बाल मजदूर का रोना रोने वालो
छोटी
भी जाती  थी स्कूल
अक्षर तो क्या
पोषाहार भी नहीं मिला उसे
मरसाब का पेट
बढ़ता गया
छोटी का पिचकता .
छोटी की सिर पर धरी ईटो
में है
माँ की दवाई
पिता की शराब
भाई की कापी
अगर
उसके सिर से उठा ली ईटे
तो भी बन जाइएगा भवन
पर छोटी के चूल्हे में लगी ईटे
ठंडी ही रह जाएगी .

Tuesday, February 7, 2012

hasya-vyang- 4

*मजनू थोडा धीरे -धीरे चल
  तेरे चलने से धूल उडती है
  लैला मेकअप कर रही है
   धूल चहरे चढ़ रही है
*तुम्हारे हाथ में जब मेरा हाथ होता है
  मेरा दिमाग ख़राब होता है
  कैसे तुम्हारी अंगुठिया निकाल लू
   दिमाग में रहता है
*मै रुमाल हू किसी और का
  मुझपे छिकता कोई और है
  तू टेक्सी है किसी और की 
  तुझपे बैठता कोई और है . 

Tuesday, January 31, 2012

kavita-aavaje

सुबह -मुह अँधेरे ही गूंजती आवाजे
गाती -चिखती-पुकारती सी आवाजे
इश्वर-अल्लाह को जगाती या पुकारती
शहर को बहरा करती आवाजे . 

Thursday, January 26, 2012

kavita-shahar ki aurat

शहर की औरत

मुह -अँधेरे
उठती है शहर की औरत
उनींदे ,कुढ़ते ,खीझते
बनाती है बच्चो का टिफिन
पहनाती है स्कूल यूनिफार्म 
करते हाय -हाय 
बैठाती  है ऑटो में 
करते बाय-बाय 
पति को  उठाती है 
भोजन बनाती ह
 jhadu  lagati  hai  
pouchha   krti  hai  
bhagam -bhag me  karti hai  shrangar
tifin  bharkar jati hai  school -office
vahi milta hai  kuch aaram
sandhya ko  ghar lotte
fir shuru ho jati hai  choka-bartan
rat tak ho jati hai  nidhal
dekhti hai  Ti Vi chlati mobile, net
sabhi kuch karti hai  shar ki   aurat
kabhi-kabhi muskati bhi shahar ki aurat .

.
 meri yaha kavita bodhi prakashan se chhapi ishtri hokar saval karti hai ...! kavita sangara me hai .

  

kavita-sita- rekha

क्या तुमने सुना है कभी
सीता -रेखा
पुरुष ने  बनाई है सिर्फ
लक्ष्मण -रेखा .

kavita-chidiya

चिड़िया
कब तक बनाती रहोगी तुम
दूसरो के घर में
अपना घर .

Thursday, January 12, 2012

lagukatha-dohara pani

     उस दिन मै पति को साथ लेकर सहेली के घर गई .इनको बैठक में छोड़ कर किचन में गई .सहेली को मटके से पिने का पानी भरते देख आश्चर्य हुआ .वाटर प्यूरी फायर  होते हुए ...मेरी आखो में प्रश्न देखा वो खिसिया गई बोली 'वो बहुत महंगा  है और....इसलिए मेहमानों को मटके का ...मै अवाक् थी और वो सामान्य ...

Sunday, January 8, 2012

kavita -naya pathr

नया शहर
नये लोग
नयी बात
नया पत्थर