Monday, October 15, 2012

kavita-hath me kyu nahi patthar

क्या तुम्हे दिखता नहीं
या .तुममे हिम्मत नहीं
तुम मेसे ही एक
झोपड़ी से निकलकर
पहुच गया महल
टूटी साईकल छोड़
बोलेरो में कर रहा सफ़र
तुम्हारे बच्चे चारा रहे बकरी
उसके पढ़ रहे प्राइवेट स्कूल
तुम्हारी बीवी तरस रही साडी
उसकी पहने सोना भारी
क्या सचमुच तुम्हे दिखता नहीं
दिखता तो होगा
आखे है सही सलामत
कान  में नहीं ठुसी  रुई
दिमाग की खिड़की है खुली
फिर
हाथ में क्यों नहीं है पत्थर .?

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