Thursday, December 29, 2011

जब भी खुलती है वह किताब
मारने लगाती है संडास
लगाती है हम पर पाबंदिया
जो जीवन में भारती है बकवास .

Monday, December 19, 2011

kavita-khvab

मेरे ख्वाब को
करना चाहते है दफ़न
करते  जा रहे है बंध
एक के बढ़ एक दर
नए दरवाजे,रोशनदानो से 
उन्हें है एतराज
दबाना चाहते  है मेरे ख्बाब .

kavita-avasar

मेरी बीमारी की खबर
दुश्मन दे गई अवसर
ख़ुशी से झलक गया जाम
जश्न जश्न और जश्न
एक की आखो से
गिरा आसू मगर .

Friday, December 16, 2011

poems-bonsai

बोनसाई बोला गर्व से
मै रहता हु घर मे
कोमल हाथ सहलाते  मुझको
पानी देते फर से
मेरा गमला चांदी का
रहता काच  me   और...
सुनकर उसकी बात
मुस्कराया  बरगद
झुमा  तेजी से
उड़  गया  बोनसाई इक  और.