Monday, December 19, 2011

kavita-khvab

मेरे ख्वाब को
करना चाहते है दफ़न
करते  जा रहे है बंध
एक के बढ़ एक दर
नए दरवाजे,रोशनदानो से 
उन्हें है एतराज
दबाना चाहते  है मेरे ख्बाब .

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