my name is bharat dosi but trolls use doshi for troling ... i am writer. my two books avilable on foboko.com i write article, stories, short stories and some poems publised in local,state and national books ,magz
Thursday, October 31, 2024
गांधी विचारक हिमांशु कुमार ने बांसवाड़ा में यह कहा
Tuesday, October 22, 2024
कविता
कविता
दीपक
मैं जब छोटा था
तब से देख रहा हूँ तुमको
दीपावली के कुछ दिन
पहले से माँ जलाती है
रोशन करती है तुमसे सुबह
जैसे कर रही स्वागत सूरज का
शाम को
मीटा रही हो तिमिर को .
दीपावली की शाम को
घर का हर कौना
जगमग जाता है तुमसे
छत की मुंडेर टिमटिमाती है
पंक्तिबद्ध ऐसे,लगते हो तुम जैसे
पढ़ा रहे हो पाठ
अनुशासन का.
माँ कहती है
तुम्हारी रोशनी का कोई विकल्प नहीं
कितनी ही जला लो मोमबत्तियां
या जला दो बल्ब की लड़ियाँ
तुम्हारी रोशनी ही भरती है
भीतरी प्रकाश
मीटाती है अंदर का अंधकार
वो तुम्हे मानती है
जलती हुई, आत्मवान
माँ इसलिए करती है रोज दिया- बाती
नीज मंदिर,तुलसी चौबार
वो जानती है तुम्हारा प्रकाश
करता है घर को सरोबर,पावन,संस्कार.
तुम्हारे होते कैसे
हो सकता है धरती पर अँधियारा ?
तुम खुद जलकर
करते हो प्रकाश
हर घर को रोशन
जिससे होते सब आबाद.
भारत दोसी
9799467007