Thursday, October 31, 2024

बांसवाड़ा में हिमांशु कुमार की सद्भावना गोष्टी

गांधी विचारक हिमांशु कुमार ने बांसवाड़ा में यह कहा

सद्भाव, इंसाफ और न्याय का संदेश देने निकले गाँधीवादी हिमांशु कुमार    

जिला कांग्रेस कमेटी बांसवाडा में गुरुवार को आयोजित गोष्ठी में गाँधी विचारक और साईकिल यात्री हिमांशु कुमार ने कहा की वाट्सअप्प पर सबके खिलाफ संदेश आते है जो महिला- पुरुष को, जाती- धर्म आदि को  बाटने की बात करते है ऐसे में मुझे लगा की लोगो में सद्भाव ,एकता ,इंसाफ ,न्याय जगाने के लिए मुझे  पैदल यात्रा करनी चाहिए . उन्होंने जंगल में आग लगने पर चिड़िया के चोंच में पानी डालने के प्रयास का जिक्र करते हुए कहा  की हमारी गिनती आग बुझाने वालो में होनी चाहिए लगाने वालो में नहीं. उन्होंने कहा की मेरी आयु सिर्फ एक संख्या है , होसला लेकर साईकिल यात्रा पर निकला हूँ. नई पीढ़ी के युवाओ से भेट हो रही है और उनको अपना संदेश दे रहा हूँ.

    गोष्ठी के पूर्व भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की पुण्यतिथि और भारत रत्न सरदार पटेल की जयंती पर उनकी प्रतिमाओं पर माल्यार्पण करके और श्रद्धा सुमन अर्पित करके उनके कार्यो को याद किया गया. गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रमेश चन्द्र पंडया ने कहा की गोविन्द गुरु और हरिदेव जोशी ने स्वतन्त्रता के आन्दोलन में बड़ा योगदान दिया जोशी ने इस क्षेत्र का विकास किया और सम्पन्नता आई. कार्यकारी अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार ने कहा की अमन ,शांति और एकता के साथ ही देश की एकता जरुरी है हिमांशु कुमार की यात्रा इसके लिए एक प्रयास है. कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष एडवोकेट केशव निनामा ने कहा की देश को इस तरह के त्याग की जरुरत है. जिला सोशल मिडिया प्रभारी भारत दोसी ने कहा  की इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष ज्ञानेंद्र त्रिपाठी,नवाब फौजदार,मुकेश जोशी, इक़बाल भाई लोखंडवाला  देवबाला राठोड,सुरेश कलाल, जाहिद एहमद सिन्धी,चंदा डामोर, भरत यादव, सरपंच भैरुलाल मइडा,कांतिलाल रावत , शाहिद मंसूरी, शहनाज बी , मिलन चाहिल, धीरजमल डामोर, हेमंत मइडा , सईद परवाना, कुसुम रावत सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पधाधिकारी उपस्थित रहे. आभार महिला कांग्रेस की राज्य सचिव लता निनामा ने माना .

फोटो

भारत दोसी

जिला सोशल मिडिया प्रभारी

Tuesday, October 22, 2024

कविता

कविता

 

दीपक

 

मैं जब छोटा था

तब से देख रहा हूँ तुमको

दीपावली के कुछ दिन

पहले से माँ जलाती है

रोशन करती है तुमसे सुबह

जैसे कर रही स्वागत सूरज का

शाम को

मीटा रही हो तिमिर को .

 

दीपावली की शाम को

घर का हर  कौना  

जगमग जाता है तुमसे

छत की मुंडेर टिमटिमाती है

पंक्तिबद्ध ऐसे,लगते हो तुम जैसे

पढ़ा रहे हो पाठ

अनुशासन का.

 

माँ कहती है

तुम्हारी रोशनी का कोई विकल्प नहीं

कितनी ही जला लो मोमबत्तियां

या जला दो बल्ब की लड़ियाँ

तुम्हारी रोशनी ही भरती है

भीतरी प्रकाश

मीटाती है अंदर का अंधकार

वो तुम्हे मानती है

जलती हुई, आत्मवान

माँ इसलिए करती है रोज दिया- बाती

नीज मंदिर,तुलसी चौबार

वो जानती है तुम्हारा प्रकाश

करता है घर को सरोबर,पावन,संस्कार.

 

तुम्हारे होते कैसे

हो सकता है धरती पर अँधियारा ?

तुम खुद जलकर

करते हो प्रकाश

हर घर को रोशन

जिससे होते सब आबाद.

भारत दोसी

9799467007