हाथ में
लेखनी है
फिर भी डर रहे हो
मौन
धारण किये
सब सह रहे हो
खुद से
खुद की व्यथा
नहीं कह रहे हो
उठो
लिखो जो लिखना चाहते हो
उगाओ
लाल सूरज जो उगाना चाहते हो
हंसिए से काट दो
जो कांटना चाहते हो
घन से तोड़ दो
तोडना चाहते हो
लिखो कुछ ऐसा
जो लिखना चाहते हो।
लेखनी है
फिर भी डर रहे हो
मौन
धारण किये
सब सह रहे हो
खुद से
खुद की व्यथा
नहीं कह रहे हो
उठो
लिखो जो लिखना चाहते हो
उगाओ
लाल सूरज जो उगाना चाहते हो
हंसिए से काट दो
जो कांटना चाहते हो
घन से तोड़ दो
तोडना चाहते हो
लिखो कुछ ऐसा
जो लिखना चाहते हो।