Tuesday, July 3, 2012

kavita - ujadana

1 . पहले लकड़ी के लिए
     फिर पानी
     फिर भूमि
     अब
     तुम्हे उजड़ना है
     हमारी रोशनी के लिए .
2.   जब    वे आए
      तुम  गए गहन जंगलो में
     काट  दिए जंगल
     अब तुम्हे समाना है उनमे .

No comments:

Post a Comment