येरमिहतना
एक महान गोटुल
- भारत दोसी
येरमिहतना का अर्थ होता है जन्म के पश्चात माँ के हाथों प्रथम स्नान। इसी नाम से बस्तर के एक गोटुल का नाम है जो एक विधास्थल है और इसको ही आधार बनाकर गोंडवाना ता पठारी ने ये कथा लिखी है जो बस्तर के आदिवासियो की संस्कृति से हमे परिचित करवाती है साथ ही आज वहा चल रहे नक्सलवाद का सामान्य परिचय कराती है।
गोटुल को लेकर कई कथित विद्द्वानो ने पुस्तके को कहानिया लिखी है जिसे लेकर समाज में कई भ्रम है इसको ये कथा साफ करती है। गोटुल संस्कृति की रक्षा , संरक्षण , संवर्धन के केंद्र रहे है जो सह शिक्षा देते थे और अनुशासन था जहा प्रेम होने पर मान्यता थी जैसा की बीर और कोयना में था। जो शहरी, पुलिस षड्यंत्र के कारन अधूरा ही रहा।
आदिवासी समाज की सामूहिकता, को तो यह कथा बताती ही है वहा प्रचलित शब्दों के अर्थ भी बताती है जो संस्कृति की प्राचीनता और महानता को बताती है।
कथा का प्रवाह है जिससे एक बार में पढ़ने का मन होता है जिज्ञासा होती है और पढ़ते ही जाते है। संविधान में दी गई 5 वी और 6 ठी अनुसूची को भी स्पष्ट किया गया है जो आजकल चल रहे पथलगढ़ी को साफ करती है। वही कथा आदिवासियों को पूर्वधर्मी (धर्मपूर्वी व्यस्था , पुनेम ) बताते हुए आज के धर्म और उसके पाखंड, अन्धविश्वास, उपयोग को हमारे सामने रखती है।
सत्ता कैसे उतखनन के लिए धर्म और पूंजी का गठजोड़ करती है फिर हत्याएं करती हो और नक्सल कैसे लोगो के हित को समझने वालो को मरती है , कैसे पुलिस निर्दोष को नक्सल कह मारती है ये सब इस कथा में है आप इसको जरूर पढ़ेंगे इसलिए ज्यादा गहराई से नहीं लिखता हूँ ये कथा पुस्तक अमेज़ॉन पर उपलब्ध है।
9799467007
एक महान गोटुल
- भारत दोसी
येरमिहतना का अर्थ होता है जन्म के पश्चात माँ के हाथों प्रथम स्नान। इसी नाम से बस्तर के एक गोटुल का नाम है जो एक विधास्थल है और इसको ही आधार बनाकर गोंडवाना ता पठारी ने ये कथा लिखी है जो बस्तर के आदिवासियो की संस्कृति से हमे परिचित करवाती है साथ ही आज वहा चल रहे नक्सलवाद का सामान्य परिचय कराती है।
गोटुल को लेकर कई कथित विद्द्वानो ने पुस्तके को कहानिया लिखी है जिसे लेकर समाज में कई भ्रम है इसको ये कथा साफ करती है। गोटुल संस्कृति की रक्षा , संरक्षण , संवर्धन के केंद्र रहे है जो सह शिक्षा देते थे और अनुशासन था जहा प्रेम होने पर मान्यता थी जैसा की बीर और कोयना में था। जो शहरी, पुलिस षड्यंत्र के कारन अधूरा ही रहा।
आदिवासी समाज की सामूहिकता, को तो यह कथा बताती ही है वहा प्रचलित शब्दों के अर्थ भी बताती है जो संस्कृति की प्राचीनता और महानता को बताती है।
कथा का प्रवाह है जिससे एक बार में पढ़ने का मन होता है जिज्ञासा होती है और पढ़ते ही जाते है। संविधान में दी गई 5 वी और 6 ठी अनुसूची को भी स्पष्ट किया गया है जो आजकल चल रहे पथलगढ़ी को साफ करती है। वही कथा आदिवासियों को पूर्वधर्मी (धर्मपूर्वी व्यस्था , पुनेम ) बताते हुए आज के धर्म और उसके पाखंड, अन्धविश्वास, उपयोग को हमारे सामने रखती है।
सत्ता कैसे उतखनन के लिए धर्म और पूंजी का गठजोड़ करती है फिर हत्याएं करती हो और नक्सल कैसे लोगो के हित को समझने वालो को मरती है , कैसे पुलिस निर्दोष को नक्सल कह मारती है ये सब इस कथा में है आप इसको जरूर पढ़ेंगे इसलिए ज्यादा गहराई से नहीं लिखता हूँ ये कथा पुस्तक अमेज़ॉन पर उपलब्ध है।
9799467007
I m copying your page for knowledge of Gotul.. nice wording
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