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Monday, January 27, 2025

दक्षिण राजस्थान में बह रही है नई हवा

दक्षिणी राजस्थान में बह रही नई हवा

पृथक भील प्रदेश और पृथक धर्म की होने लगी मांग

भारत दोसी

 

राजस्थान के दक्षिणी भाग के साथ ही गुजरात,मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भील, आदिवासियों में अलग ही हवा चल रही है जो अपने अस्तित्व, पहचान को बचाने की है जो पृथक भील राज्य और अलग धर्म को ले जा रही है. इसी बयार के चलते इस क्षेत्र से वर्तमान में चार विधायक है वही बाँसवाडा – डूंगरपुर संसदीय क्षेत्र से एक सांसद राजकुमार रोत विजयी हुए है यह सभी जन प्रतिनिधि विभिन्न मंच के साथ ही विधानसभा और लोकसभा में अपनी पहचान की आवाज उठाते रहते है.

  पिछले दिनों सांसद राजकुमार रोत के एक बयान ‘आदिवासी हिन्दू  नहीं है’ ने बवाल खड़ा कर दिया. माहौल तनाव पूर्ण हो गया जिसमे सत्तारूढ़ दल बीजेपी ने घी का काम किया जिस शिव मंदिर में रोत गए उसे गंगाजल से धुलवा दिया इससे विवाद छुआछुत का भी खड़ा हो गया. खबर रहे की देश के अनेक भागों से आदिवासी इस तरह की आवाज उठाते रहते है जिसमे अलग सरना धर्म ,अलग धर्म कोड आदि की बातें झारखंड और छत्तीसगढ़,पूर्वात्तर राज्य  से आती रहती है जिसका उद्देश्य जनगणना में अलग गिनती रहा है वैसे 2011 की जनगणना के अनुसार आदिवासी 8 फीसदी से ज्यादा है देश में.

    बीजेपी की चिंता आदिवासियों के हिन्दू धर्म से अलग होने की है जो स्वाभाविक भी है लेकिन आदिवासियों की पूजा पद्दति, संस्क्रति, पहनावा, रीतिरिवाज, बोली,खानपान पर भी चर्चा होती रहती है.

    आदिवासियों द्वरा अलग राज्य की मांग करना इसलिए उचित नहीं लगता की देश में कोई भी राज्य किसी जाति,धर्म, सम्प्रदाय के आधार पर नहीं बना. राज्य भोगौलिक और भाषा के आधार पर गठित हुए है ऐसे में भील प्रदेश की मांग पर पुर्विचार होना चाहिए इसके लिए भीली बोली को भाषा बनने का प्रयास हो रहा है इसके शब्दकोश, साहित्य की रचना की जा रही है ठीक भी हैं की बोली मजबूत हो और आगे जाकर भाषा बने.

     प्रत्येक पंथ, समुदाय को अपनी संस्क्रति, पहचान को संरक्षित करने का हक है लेकिन यह हिंसात्मक नहीं होना चाहिए या दुसरे समुदायों में  असुरक्षा का भाव नहीं आना चाहिए इतिहास के पन्ने उलटकर कुछ महापुरुषों के कहे को या उनके आन्दोलन  को मार्ग मानकर चलते वक्त सतर्क रहने की जरुरत है कई बार गाडी रिवर्स  हो जाती है वही इस तरह की बातें होने पर करने वालों की लेबलिंग भी अनुचित है.

भारत दोसी 9799467007