Friday, April 4, 2025

तपस्या ना भूलने लायक उपन्यास

तपस्या
नहीं भूलने लायक उपन्यास
विश्वनाथ तवर का उपन्यास "तपस्या " पढ़ते हुए अनेक बार मुझे अपना कॉलेज जीवन याद आया स्मृति मैं उस उम्र की चकलस उभर गई 1970- 80 की पृष्ठभूमि में  लिखे इस उपन्यास में पात्र रामप्रकाश और वैदेही को पढ़ते हुए लगता है कि टाइम मशीन बहुत पीछे ले गई है और सब कुछ हमारे समक्ष घटित हो रहा है.
    मध्यम वर्ग के परिवारों की उसे कालखंड में आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी लेकिन परिवार में खुलापन था प्रगतिशीलता थी. शिक्षक प्रशिक्षण कोर्स पूर्ण होने के पश्चात प्रेमी- प्रेमिका रामप्रकाश और वैदेही अपने-अपने परिवार में होते हैं .प्रेमिका बहुत ज्यादा बेचैन रहती है समय का चक्र ऐसा घूमता है की तलाकशुदा से ब्याह की बात होती है उसे समय यह बड़ी बात थी. उपन्यास में पात्रों का चयन और उनके मध्य संवाद को बहुत कुशलतापूर्वक लिखा गया है जो कई बार लंबे-लंबे लेकिन जिज्ञासा बनाए रखते हैं.
    शिप्रा ,माधुरी ,माधवी ,विमल आदि पात्रों को घटनाक्रम से धारा प्रवाह जोड़ दिया गया है लेखन की शैली ऐसी है कि पूर्व के पड़े  अनेक उपन्यास याद आते हैं अनेक बार आंखें नम हो जाती है अच्छे लोगों के साथ बुरा होता पढ़कर  समाज व्यवस्था बंधन व्यर्थ लगते हैं वैदेही जब कहती "मैं आपको भूलना ही भूल गई थी" तब रिश्तो का महत्व समझ में आता है
भारत दोषी
गांधी सद्भावना सम्मान प्राप्त लेखक

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