लघुकथा - बेचारी समानता
एक घंटे की यात्रा के बाद डॉ त्रिवेदी अपनी पत्नी के साथ वाटिका पहुचे ही थे की पत्नी बोली " वापस चलो घर "
"क्यों ?"
" चलो तो सही "
"पर क्यों ?"
"चलते हो के नहीं ?" पत्नी ने क्रोध से कहा
वे दोनों फिर से घर को चल दिए। फिर एक घंटे का सफर किया। पत्नी ने साड़ी बदली और बोली " चलो वापस वाटिका चलते है। "
अब फिर....... डॉ त्रिवेदी ने खीज कर मन में कहा सिर्फ साड़ी बदलने घर आई थी क्या ? ये औरते भी बस....... .
वे फिर घंटे का सफर कर वाटिका पहुंचे। भोजन किया। वापस आने लगे तो डॉ त्रिवेदी ने देखा उनकी गली की सफाई कर्मी भी वैसी ही साड़ी पहने है जैसी पत्नी ने पहले पहनी थी। उनको पत्नी की समझदारी पर गर्व हुआ। उन्होंने मुँह बना कर कहा " ये जातीया भी हमारी बराबरी कर रही है। पत्नी ने उदास हो कर सहमति व्यक्त की।
-भारत दोसी 9799467007
एक घंटे की यात्रा के बाद डॉ त्रिवेदी अपनी पत्नी के साथ वाटिका पहुचे ही थे की पत्नी बोली " वापस चलो घर "
"क्यों ?"
" चलो तो सही "
"पर क्यों ?"
"चलते हो के नहीं ?" पत्नी ने क्रोध से कहा
वे दोनों फिर से घर को चल दिए। फिर एक घंटे का सफर किया। पत्नी ने साड़ी बदली और बोली " चलो वापस वाटिका चलते है। "
अब फिर....... डॉ त्रिवेदी ने खीज कर मन में कहा सिर्फ साड़ी बदलने घर आई थी क्या ? ये औरते भी बस....... .
वे फिर घंटे का सफर कर वाटिका पहुंचे। भोजन किया। वापस आने लगे तो डॉ त्रिवेदी ने देखा उनकी गली की सफाई कर्मी भी वैसी ही साड़ी पहने है जैसी पत्नी ने पहले पहनी थी। उनको पत्नी की समझदारी पर गर्व हुआ। उन्होंने मुँह बना कर कहा " ये जातीया भी हमारी बराबरी कर रही है। पत्नी ने उदास हो कर सहमति व्यक्त की।
-भारत दोसी 9799467007
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