Friday, October 26, 2012

kavita -char ravan

रावण  तो कब का मर गया
अपनी बहन पर तेजाब फैकने वाले से
कौन भाई लेता है बदला
खटखटाता है न्यायालय का खटका

रावण  तो कब का मर गया
लक्ष्मण जिन्दा है
खिचता रहता है रेखाए
कभी खाप में ,कभी अपने -आप में .

रावण  तो कब का मर गया
अब छोड़ देता है अपहरण कर्ता
बगैर छुए ,भोगे ,मारे
कोई सीता .

रावण तो कब का मर गया
अपनी मान्यता ,संस्कृति ,आस्था को बचाने
लड़ता,मरता  है कौन भला ,पागल नादान
इन सबको बचाने .

Monday, October 15, 2012

kavita - dimak ke liye

मै अपनी कविताओ का संग्रह छपवा दू
लाइब्रेरी के ढेर में एक और बड़ा दू
खूश होगा कौन ?
दीमक .....और कौन ?

kavita-kalam bechana nahi aata

तुम कहते हो मुझे
तुमसा लिखना नहीं आता
सत्ताधारियों को अच्छा लगे
एसा कहना नहीं आता
घोषति में मंच पर बैठ
एसा पढना नहीं आता
सुन भाई ,
मुझे कलम बेचना नहीं आता .

kavita-hath me kyu nahi patthar

क्या तुम्हे दिखता नहीं
या .तुममे हिम्मत नहीं
तुम मेसे ही एक
झोपड़ी से निकलकर
पहुच गया महल
टूटी साईकल छोड़
बोलेरो में कर रहा सफ़र
तुम्हारे बच्चे चारा रहे बकरी
उसके पढ़ रहे प्राइवेट स्कूल
तुम्हारी बीवी तरस रही साडी
उसकी पहने सोना भारी
क्या सचमुच तुम्हे दिखता नहीं
दिखता तो होगा
आखे है सही सलामत
कान  में नहीं ठुसी  रुई
दिमाग की खिड़की है खुली
फिर
हाथ में क्यों नहीं है पत्थर .?

Saturday, September 22, 2012

kavita - jumala

jaise hi unhe pata laga
meri jati ka
meri yogyata ,pratiba ,
visheshata aur vidhvata
dikhana band ho gai .

mera likha kai se
mara huaa ho gaya
mera bola kisi or ka
tarasa ho gaya

meri jati ko lekar
kitane hi purvagrha bhare hai inme
jisaki taraju par
tolate hai mujhe

jati kisi insan ko janane
samajhne
atyachar ,shoshan karne adhikar hai

kisi bhi pad par pahuch jao
unki najro me meri ek aaukat hai
usko pramanit karne ke
jumale hajar hai .
ka